कोरोनवायरस की वजह से दवाइयों के स्टॉक के जांच में जुटी सरकार | ZNDM NEWS

कोरोना वायरस ने चीन के साथ पुरे विश्व में कोहराम मचा रहा है  जिसके कारण जहां चीन में कारोबार पूरी तरह से ठप हो चुका है। वहीं भारतीय फॉर्मा सेक्टर में भी इससे पडने वाले असर की जांच शुरू हो चुकी है। इसके तहत सभी राज्यों से एंटीबॉयोटिक्स जैसी दवाओं में इस्तेमाल सामग्री का भंडारण और बिक्री की जानकारी मांगी गई है।

कोरोना वायरस ने चीन के साथ पुरे विश्व में कोहराम मचा रहा है  जिसके कारण जहां चीन में कारोबार पूरी तरह से ठप हो चुका है। वहीं भारतीय फॉर्मा सेक्टर में भी इससे पडने वाले असर की जांच शुरू हो चुकी है। इसके तहत सभी राज्यों से एंटीबॉयोटिक्स जैसी दवाओं में इस्तेमाल सामग्री का भंडारण और बिक्री की जानकारी मांगी गई है। इसके लिए राष्ट्रीय फॉर्मास्यूटिकल मूल्य प्राधिकरण (एनपीपीए) ने आगामी 3 मार्च तक समय भी दिया है। दरसल सरकार ये जानना चाहती है कि भारत दवाओं के आयात को लेकर चीन पर कितना निर्भर है। एनपीपीए ने राज्य औषधि नियंत्रण विभागों को दिए आदेश में चीन से आयात होने वाले 58 तरह की दवा सामग्रियों का भंडारण और उनकी कीमतों में उतार-चढ़ाव से जुड़ी रिपोर्ट सौंपने को कहा है। इनमें पैरासिटामॉल, बी12, बी1, बी6, एस्पिरिन, एजिथ्रोमाइसिन, मेट्रोनिडाजोल, एमॉक्सिसिलिन, ओफ्लॉक्सासिन, सेफिक्सिमाय, लोपिनविर और राइटोनविर इत्यादि शामिल हैं।
दरअसल बीते कुछ सालो में दवा कारोबार को लेकर भारत ने काफी हद तक अन्य देशों पर निर्भरता कम करने के प्रयास किए हैं। दवाओं को बनाने में इस्तेमाल सामग्री की बड़ी खेप के उत्पादन को देश में ही बढ़ावा दिया जा रहा है।इसके अलावा इसके कई अति महत्वपूर्ण दवाएं हैं, जिनके निर्माण में सामग्रियां चीन से आयात होती हैं। कोरोना वायरस के चलते पिछले दो महीने से फॉर्मा सेक्टर को सबसे ज्यादा प्रभावित माना जा रहा है।
एनपीपीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोरोना वायरस के कारण चीन से आने वाली आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए कमेटी ने ये जानकारी मांगी है। भारतीय बाजार में दवाओं की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि को रोकने के लिए ये कदम उठाए जा रहे है । उन्होंने ये भी बताया कि इसके लिए एक फॉर्मेट को तय किया है जिसमें मौजूदा भंडारण के अलावा नवंबर 2019 और फरवरी 2020 में दवाओं की बिक्री व मांग को भी शामिल किया है।
बता दें कि दुनियाभर में मरने वालों की संख्या 3,000 से भी ज्यादा हो गई है। चीन में अभी तक इससे मरने वालों की संख्या 2,912 हो गई है।