कोरोनावायरस की वजह से भारत को 35 करोड़ डॉलर का भारी नुकसान हो सकता है | कोरोना ने भारत का कारोबार ठप कर दिया

कोरोना वायरस की वजह से पूरे विश्व में इस वक्त हड़कम्प मच चुका है और अब इसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था काफी ख़राब हो गई है | इस वक्त दुनिया में इसके चलते संक्रमित लोगों की संख्या डेढ़ लाख से ऊपर पहुंच चुकी है| साथ ही मरने वालों का भी आंकड़ा 6 हजार से भी ज्यादा हो चुका है। इस वक्त कोरोना वायरस से दुनिया के करीब 150 से अधिक देश संक्रमित हो चुके हैं ।

कोरोना वायरस की वजह से पूरे विश्व में इस वक्त हड़कम्प मच चुका है और अब इसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था काफी ख़राब हो गई है | इस वक्त दुनिया में इसके चलते संक्रमित लोगों की संख्या डेढ़ लाख से ऊपर पहुंच चुकी है| साथ ही मरने वालों का भी आंकड़ा 6 हजार से भी ज्यादा हो चुका है। इस वक्त कोरोना वायरस से दुनिया के करीब 150 से अधिक देश संक्रमित हो चुके हैं । हालांकि भारत की इस बात के लिए तारीफ की जानी चाहिए कि उसने समय रहते कई प्रकार के कदम उठाए और नतीजा सामने है की कोरोना वायरस भारत को उस तरह प्रभावित नहीं कर पाया जैसा कि इन दिनों अमेरिका और यूरोप प्रभावित हैं। इस बीच संयुक्त राष्ट्र की कांफ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट ने कहा है कि कोरोना वायरस से प्रभावित दुनिया की 15 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत भी है। चीन में उत्पादन में आई कमी का असर भारत पर साफ-साफ देखा जा सकता है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था को लगभग 35 करोड़ डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
दरअसल भारत सरकार ने कोरोना के चलते आगामी 15 अप्रैल तक के लिए सभी देशों के वीजा रद्द कर दिए हैं। आप को बता दें की इसी क्षेत्र से दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमाई प्रति वर्ष होती है और इसमें नुकसान साफ-साफ दिख रहा है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन का अनुमान है कि विमानन उद्योग को यात्रियों से होने वाले कारोबार में कम से कम 63 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। ऑटोमोबाइल उद्योग पर भी इसका खतरा बाकायदा देखा जा सकता है। इस क्षेत्र में भारत में लगभग पौने चार करोड़ लोग काम करते हैं। कोरोना वायरस की वजह से  भारत के ऑटो उद्योग के लिए कल-पुर्जो की किल्लत पैदा हो चुकी है। ऐसे में यहां बेरोजगारी का खतरा बढ़ गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी में कहा गया है कि अंटार्कटिका को छोड़ दिया जाए तो इस भयावह स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि छह करोड़ की आबादी वाले इटली में मरने वालों की संख्या रिकॉर्ड तोड़ रही है। आप को बता दे इतनी तेजी से मौत तो चीन में भी नहीं हुई है। हालांकि भारत में संक्रमित होने वालों का आंकड़ा 138 के पार है। इससे साफ़ जाहिर होता है की सरकार की चेतना, जागरूकता और जनता के इसमें पूरी तरह साथ देने के चलते कोरोना वायरस को तेजी से फैलने से रोकने में मदद मिल रही है।  इस वायरस ने शेयर मार्केट में काफी बड़ी चिंता पैदा की है। वहां एक दिन में 11 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है जो 2008 के वित्तीय संकट के बाद सबसे बुरा दौर कहा जा सकता है |
कोरोना वायरस के फैलने की चिंता इस वक़्त आरबीआइ (RBI) को भी है। आरबीआइ भी मानता है कि दुनिया के विभिन्न देशों में इसके फैलने से वैश्विक पर्यटन और व्यापार पर काफी बुरा प्रभाव पड़ेगा।अगर ध्यान दे तो अमेरिका, ईरान के तनाव के चलते जनवरी की शुरुआत में कच्चे तेल और सोने के दाम चढ़ गए थे और अब कोरोना वायरस के चलते इनमें गिरावट आ चुकी है । वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस का प्रभाव 2003 में फैले सार्स के मुकाबले काफी  अधिक है।
जब सार्स जैसी संकट के समय चीन छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश था और उसका वैश्विक जीडीपी में योगदान 4.2 प्रतिशत था, जबकि कोरोना के समय में वह दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और वैश्विक जीडीपी में 16.3 प्रतिशत का योगदान देता है। ऐसे में यह वायरस केवल झटका नहीं देगा, बल्कि व्यापक प्रभाव छोड़ेगा। अनुमान लगाया जा रहा है की वैश्विक जीडीपी में पहली तिमाही में 0.8 फीसद और दूसरी में 0.5 फीसद की कमी आएगी।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस का प्रभाव 2.7 टिलियन डॉलर का माना जा रहा है, जो भारत की कुल अर्थव्यवस्था के बराबर है। आप को बता दे  अमेरिका 19 टिलियन डॉलर और चीन 13 टिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाले देश हैं। दवाइयों की खपत और वाहनों की बिक्री में कटौती तथा पर्यटन से लेकर होटल उद्योग आदि सभी इसकी चपेट में रहेंगे।  इस वक्त भारत को कोरोना के साथ-साथ अपनी आर्थिक स्थितियों से भी निपटना है। गिरी हुई विकास दर को थामना है और अंतरराष्ट्रीय बाजार से मुकाबला भी करना है। कहा जा रहा है कि चीन की विकास दर एक फीसद गिर सकती है।