कोरोना ने बढ़ाया बेरोजगारी का खतरा, 30 करोड़ से अधिक लोगों की जा सकती हैं नौकरियां!

संयुक्त राष्ट्र की श्रम संगठन "अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन (ILO)" के अनुसार, इस साल अप्रैल से जून के दौरान महज तीन महीने में ही करीब 30.5 करोड़ लोगों की पूर्णकालिक नौकरियां समाप्त होने का खतरा हैं। संगठन ने पिछले पूर्वानुमान में कहा था कि इस महामारी के कारण जून तिमाही में हर सप्ताह औसतन 48 घंटे की कार्य अवधि वाले 19.5 करोड़ फुल टाइम नौकरियों का नुकसान हो सकता है।

कोरोना ने बढ़ाया बेरोजगारी का खतरा, 30 करोड़ से अधिक लोगों की जा सकती हैं नौकरियां!
बेरोजगारी का खतरा

 

लेकिन महामारी पर काबू पाने के लिए दुनिया भर में लॉकडाउन  बढ़ाये जाने के बाद संगठन ने एक बार फिर लोगों की जाने वाली नौकरियों का पूर्वानुमान बढ़ा दिया है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने कहा कि रिटेल और मैन्युफैक्चरिंग रिस्क जैसे गंभीर संकट वाले क्षेत्रों में 43 करोड़ से अधिक इंटरप्राइजेज पर ज्यादा खतरा है। ILO के  संगठन के अनुसार, लॉकडाउन के कारण पहले महीने में श्रमिकों की आय में 60 फीसद की गिरावट देखी गई है। अफ्रीका और अमेरिका में 80 फीसद से अधिक गिरावट, यूरोप और मध्य एशिया में 70 फीसद और एशिया और प्रशांत क्षेत्र में 21.6 फीसद गिरावट देखी गई है।

वहीं अगर भारत की बात करें तो देशभर में फैले कोरोना महामारी और उसके चलते लॉकडाउन से बेरोजगारी दर बढ़कर 23.4% पर पहुंच गई है। सीएमआईई की रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन से भारत की शहरी बेरोजगारी दर 30.9% तक बढ़ सकती है, हालांकि कुल बेरोजगारी 23.4% तक बढ़ने का अनुमान है। यह रिपोर्ट अर्थव्यवस्था पर कोरोना के बुरे प्रभाव को दर्शाती है।

ILO संगठन ने कहा कि इस महामारी के कारण अनौपचारिक क्षेत्र के 1.6 अरब कामगारों के समक्ष जीवनयापन का खतरा उत्पन्न हो चुका है क्योंकि महामारी के कारण उनके रोजी-रोटी के साधन बंद हो चुके हैं।  यह पूरी दुनिया के 3.3 अरब कार्यबल का करीब आधा है। ILO के महानिदेशक गाय राइडर ने कहा कि महामारी और नौकरियों के संकट को देखते हुए दुनिया के सबसे कमजोर श्रमिकों की रक्षा करने ज्यादा जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि लाखों श्रमिकों के लिए अगर आय नहीं है तो इसका मतलब उनके लिए न तो भोजन, न सुरक्षा और न ही उनका कोई भविष्य है। दुनिया भर में लाखों व्यवसाय मुश्किल में हैं। उनके पास कोई बचत नहीं है न ही कोई कर्ज बचा है। राइडर ने कहा, ये काम करने के लिए दुनिया के असली चेहरे हैं। यदि मौजूदा समय में हम उनकी मदद नहीं करते हैं, तो वे बर्बाद हो जाएंगे।

8.4% से बढ़कर 23% हो गई बेरोजगारी दर

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) का अनुमान है कि बेरोजगारी दर मार्च महीने के मध्य के 8.4% से बढ़कर 23% हो गई है। सीएमआईई के आंकड़े के अनुसार, शहरी क्षेत्र में बेरोजगारी दर 15 मार्च 2020 को 8.21 फीसद थी। यह 22 मार्च 2020 को 8.66 फीसद पर आई। फिर 24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा के बाद इसमें जबरदस्त तेजी आई। 29 मार्च 2020 को यह 30.01 फीसद पर जा पहुंची और फिर 5 अप्रैल 2020 के आंकड़े के अनुसार, यह 30.93 फीसद पर आ गई है।