चीन और अमेरिका समेत भारत भी अब COVID 19 की वैक्सीन बनाने में

अब तक Coronavirus का कोई इलाज मौजूद नहीं है और ऐसी स्थिति में सिर्फ इससे बचाव ही किया जा सकता है और यही वजह है कि जनता कर्फ्यू से लेकर कुछ जगहों पर लॉकडाउन करने जैसे अहम कदम उठाए जा रहे हैं।। पहले खांसी, जुकाम या बुखार जो सर्दियों के मौसम में सामान्य लगता था लेकिन अब लोगों में भय है । वजह है Coronavirus । इस जानलेवा वायरस के लक्षण इन्हीं सामान्य रोगों जैसे होते हैं, इसलिए लोग कुछ समझ नहीं पाते | आप को बता दे  

चीन और अमेरिका समेत भारत भी अब COVID 19 की वैक्सीन बनाने में
चीन और अमेरिका समेत भारत भी अब COVID 19 की वैक्सीन बनाने में

चीन और अमेरिका समेत भारत भी अब COVID 19 की वैक्सीन बनाने में जुटा हुआ है | Coronavirus की अब तक कोई वैक्सीन नहीं बन पाई है।आप को बता दे दुनिया भर में Coronavirus से करीब 13 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग लाखो लोग इस बिमारी से संक्रमित हैं|इस महामारी से बचने के लिए तमाम देश इस वक्त वैक्सीन बनाने में जुटे है , लेकिन अब तक सफल नहीं हो पाए है|अंदाजा ये लगाया जा रहा है कि अभी वैक्सीन आने में एक साल से 18 महीने का वक्त लग सकता है|
अब तक Coronavirus का कोई इलाज मौजूद नहीं है और ऐसी स्थिति में सिर्फ इससे बचाव ही किया जा सकता है और यही वजह है कि जनता कर्फ्यू से लेकर कुछ जगहों पर लॉकडाउन करने जैसे अहम कदम उठाए जा रहे हैं।।
पहले खांसी, जुकाम या बुखार जो सर्दियों के मौसम में सामान्य लगता था लेकिन अब लोगों में भय है । वजह है Coronavirus । इस जानलेवा वायरस के लक्षण इन्हीं सामान्य रोगों जैसे होते हैं, इसलिए लोग कुछ समझ नहीं पाते | आप को बता दे  


सांस लेने से जुड़ी दिक्कतों और फ्लू के बेहतर इलाज का ईजाद करने वाली भारतीय औषधि कंपनी Cipla (सिप्ला) अगले छह महीने में महामारी बन चुके Coronavirus के इलाज की दवा पेश कर सकती है। अब अगर ऐसा हो गया तो Cipla (सिप्ला) कोरोना वायरस की दवा बनाने वाली पहली भारतीय कंपनी बन जाएगी। इसके लिए Cipla (सिप्ला) कंपनी सरकारी प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर कोरोना की दवा विकसित करने के साथ ही इस बीमारी में सांस लेने से संबंधित तकलीफों में ली जाने वाली दवा, अस्थमा में ली जाने वाली दवा, एंटी वायरल दवाओं और एचआईवी की दवाओं के इस्तेमाल पर भी प्रयोग कर रही है |
कोरोना वायरस ने अमेरिका को भी बुरी तरह से अपनी चपेट में ले लिया है। ऐसे में वहां की भी कई कंपनियां लगातार वैक्सीन बनाने में जुटी है , लेकिन कोरोना वायरस बनाने में अमेरिका की कोशिशें डोनाल्ड ट्रंप की वजह से दब से गई हैं। ट्रंप ने जर्मन फर्म CureVac को अमेरिका की धरती पर कोरोना वायरस की दवा बनाने का न्योता दिया है। बता दें कि कोरोना वायरस के आने से कुछ महीने पहले से ही अथॉरिटीज कुछ साइंटिस्ट की जांच कर रहे हैं, जिन पर आरोप है कि वह चीन के लिए अमेरिका से बायोमेडिकल रिसर्च चुरा रहे थे।


कोरोना वायरस की शुरुआत चीन से ही हुई थी।और इस वक़्त चीन में करीब 1000 वैज्ञानिक Coronavirus की दवा बनाने के काम में जुटे हैं।
ऐसे लोग जिनमें कोरोना वायरस के लक्षण हों, वे आई-ब्रूफेन (Ibuprofen) ना लें, इसकी जगह पेरासिटामोल (Paracetamol) का इस्तेमाल करें। फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्री के इस दावे का समर्थन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी किया है। संयुक्त राष्ट्र के इस स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों ने कहा है कि वे इस पर आगे भी निर्देश जारी करेंगे। ख़ैर अब देखना है की महामारी बन चुके लाइलाज Coronavirus  का इलाज कब तक बन पाएगा |