मजदूरों के मामले में केंद्र सरकार सुस्त नजर आरही है 523 से अधिक मजदूरों की मौत

कोरोना वायरस के चलते पुरे देश में मजदूरों के लिए आजीविका का संकट बन चूका है , 22 मार्च के बाद से ही मजदूरों के लिए अपना जीवन यापन करना मुश्किल होता रहा है

मजदूरों के मामले में केंद्र सरकार सुस्त नजर आरही है 523 से अधिक मजदूरों की मौत

 

सरकार के तमाम दावे मजदूरों को देकते हुआ सब गलत लगते है सरकार ने ट्रैन तो चलाई पर मजदूरों से कराया लेने की बात आई कांग्रेस के पलटवार के बाद सरकार की आँखे खुली तो मजदूरों का किराया माफ हुआ। इसके बाद भाई सरकार मजदूरों को ले कर अभी भी सजक नहीं दिख रही है।

बीते 55 दिन के तालाबंदी में नजर डाले दो 523 के लगभग मजदूरों की मौत हो चुकी है वही 750 से अधिक मजदुर घायल है। ये बात अलग है की सरकार 20 लाख करोड़ लोगो की मदद के लिए लगा रही है उसमे भी अब आरोप प्रत्यारोप चल रहा है। इसके बौजूद मजदूरों के लिए रोज एक नई चुनौती सामने आरही है।औरंगाबाद ट्रैन से खुचालने की खबर के बाद से ही तमाम खबर हर घंटे सामने आरही है जहा मजदूरों के उत्पीड़न की बात उठ रही है।

मजदूरों की माने तो उनका बोलना है सरकार कुछ नहीं कर रही है। रोड पे पुलिस मार रही है और गाड़ी और घर में रहे तो भूक , इस लिए आपने आपने गावो जाने के अलावा हमारी पास कोई और रास्ता भी नहीं है।

आज की बात करे तो पुरे देश में तीन हादसे हुए है मध्य प्रदेश में 1 बिहार में 1 और उत्तर प्रदेश में 1 इसमें मरने वालो मजदूरों की संख्या 18 है वही 70 क़रीब मजदुर घायल है।  और इस हपते की बात करे तो 123 से अधिक मजदुर की मौत हो चुकी है।  वही 200 से अधिक घायल है।

कोरोना के इस काल में ये परेशानी सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनवाती सामने बन कर आरही है। इसके दो अलग रूप हो सकते है. पहला विपक्छ को नया मुदा मिल रहा है और साथ में में आने वाले राज्य के चुनावों में सरकार को भारी दिकत का सामना करना पड़ेगा।