भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत

सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में लगातार गिरावट के कारण सरकार की हो रही आलोचनाओं के बीच वित्तमंत्री ने कहा अर्थव्यवस्था में सुधार के अतिरिक्त उपाय सरकार ने पहले तीन चरणों में नये उपाय किए हैं। सरकार ने निजी तथा सरकारी निवेश, उपभोग और निर्यात बढ़ाने के लिए कई कदम उठाये हैं जिसके कारण अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिखने लगे हैं।  इसमें रीयल एस्टेट परियोजनाओं के लिये नया कोष बनाने, निर्यात क्षेत्र के लिये प्रोत्साहन , बैंकों का विलय और सूक्ष्म , लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) और वाहन क्षेत्र के लिए रियायतों की घोषणा शामिल है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था के संकट में होने के विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए मंगलवार को लोकसभा में कहा कि इसका प्रबंधन ‘कुशल डाक्टरों’ के हाथ में है तथा सरकार द्वारा उठाये गए स्पष्ट कदमों के कारण अर्थव्यवस्था में आरंभिक सुधार दिखाई दे रहे हैं। सीतारमण ने कहा कि “सरकार अर्थव्यवस्था में सुधार के अतिरिक्त उपाय करने के लिए प्रतिबद्ध है। मोदी सरकार वित्तीय अनुशासन की राह पर मजबूती से चलते हुए, अर्थव्यस्था की गाड़ी के सभी इंजनों की गति बढ़ाने के प्रबंध किए हैं तथा महिलाओं , अनुसूचित जाति , जन जाति, बच्चों सहित समाज के अन्य सभी वर्गों के कल्याण के लिए निरंतर आवंटन बढ़ा रही है।“

सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में लगातार गिरावट के कारण सरकार की हो रही आलोचनाओं के बीच वित्तमंत्री ने कहा अर्थव्यवस्था में सुधार के अतिरिक्त उपाय सरकार ने पहले तीन चरणों में नये उपाय किए हैं। सरकार ने निजी तथा सरकारी निवेश, उपभोग और निर्यात बढ़ाने के लिए कई कदम उठाये हैं जिसके कारण अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिखने लगे हैं।  इसमें रीयल एस्टेट परियोजनाओं के लिये नया कोष बनाने, निर्यात क्षेत्र के लिये प्रोत्साहन , बैंकों का विलय और सूक्ष्म , लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) और वाहन क्षेत्र के लिए रियायतों की घोषणा शामिल है।

वित्त वर्ष 2020-21 के बजट पर लोकसभा में करीब 12 घंटे चली चर्चा का जवाब देते हुये श्रीमती सीतारमण ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में विदेशी निवेश बढ़ा है, विनिर्माण क्षेत्र ने गति पकड़ी है, दो महीने गिरने के बाद वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में लगातार वृ़द्धि हुई है और शेयर बाजार का ग्राफ ऊपर की तरफ जा रहा है। ये सभी संकेतक अर्थव्यवस्था में सुधार की ओर इशारा कर रहे हैं। सीतारमण ने कहा कि बीएसई सेंसेक्स मार्च 19 से लेकर 31 जनवरी 2020 तक 5.6 प्रतिशत बढ़ गया जो सरकार के अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए उठाये गये कदम हैं।

चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 29 खरब डॉलर की हो गयी है  और उम्मीद जताई जा रही है कि इस रफ्तार से देश की अर्थव्यवस्था 50 खरब डॉलर पर पहुँच जाएगी |

गौरतलब है कि मौजूदा केंद्र सरकार के कार्यकाल में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की औसत विकास दर 7.4 प्रतिशत तथा  खुदरा महँगाई दर 4.5 प्रतिशत रही है।

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस हफ्ते की शुरुआत में कहा कि सरकार ने अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए तीन चरणों में कई उपाय किए हैं। साथ ही आगे और भी कदम उठाने के संकेत दिए है।