बाबा साहेब अम्बेडकर भारत के संविधान की पहचान | बाबा साहेब की 129 वीं जयंती |

भीमराव आम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को ब्रिटिश भारत के मध्य भारत प्रांत (अब मध्य प्रदेश) में स्थित महू नगर सैन्य छावनी में हुआ था। उनका परिवार कबीर पंथ को माननेवाला मराठी मूूल का था |

बाबा साहेब अम्बेडकर भारत के संविधान की पहचान | बाबा साहेब की 129 वीं जयंती |

||बाबा साहेब की 129 वीं जयंती ||

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने ही सिर्फ संविधान का निर्माण किया बल्कि देश की सबसे बड़ी बैंक कहे जाने वाले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बचपन से ही बाबा साहेब दलितों के बारे में सोचते है । एक दलित बच्चा होने के कारण उन्हें पता था की किस तरह दलित बच्चों और दूसरे बच्चों में भेदभाव किया जाता था।
अम्बेडकर जी एक सामाजिक कार्यकर्ता भी थे इसलिए उन्होंने भारत में दलित बौद्ध आंदोलन चलाया।

आंबेडकर ने अपनी पढाई विषम परिस्थितियों में शुरू की थी। स्कूल में बाबा साहेब को काफी भेदभाव झेलना पड़ा था। अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूल में हासिल की और उच्च शिक्षा  राजनीतिक विज्ञान और अर्थशास्त्र से पूरी की। इसके बाद बड़ौदा के गायकवाड़ शासक के तृतीय राजा ने उन्हें उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका भेजा। जहां उनका चयन कोलंबिया यूनिवर्सिटी में हुई। यहां उन्होंने पीएचडी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे भारत वापस लौट आए और बड़ौदा के राजमहल में काम करना शुरू किया। भारत के संविधान के एक प्रमुख वास्तुकार, अम्बेडकर ने महिलाओं के अधिकारों और मजदूरों के अधिकारों की भी वकालत की। स्वतंत्र भारत के पहले कानून और न्याय मंत्री के रूप में मान्यता प्राप्त, भारतीय गणराज्य की संपूर्ण अवधारणा के निर्माण में अम्बेडकर जी का योगदान काफी बड़ा है। देश में हर साल उनका सम्मान करने के लिए, उनका जन्मदिन हर 14 अप्रैल को अच्छे से मनाया जाता है। आज उनके जयंती के अवसर आइए जानते है कुछ खास बातए

 1 भारत का संविधान बनाने में बाबा साहेब का बहुत बड़ा योगदान है।
 2  भीमराव अंबेडकर के बचपन का नाम रामजी सकपाल था।
 3  उन्हें  64 विषयों महारत हासिल थी और 9 भाषाएं बोल सकते थे।
 4  अपने जीवन काल में उन्होंने कई सालो तक बौद्ध धर्म का अध्ययन किया था। 14       अक्टूबर, 1956 को करीब 5 लाख समर्थक के साथ उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया था |
 5 दलितों की स्थितिको सुधरने के लिए उन्होंने  अपने जीवन में काफी काम किया और छूआछूत जैसी प्रथा को खत्म करने में उनकी बड़ी भूमिका थी। इसलिए उनको बौद्ध गुरु माना जाता है |
  6 उनका निधन 6 दिसंबर, 1956 को दिल्ली स्थित उनके घर पर हुआ थाऔर उनके  अनुयायियों का मानना है कि उनके गुरु भगवान बुद्ध की तरह ही काफी  प्रभावी और सदाचारी थे इस लिए डॉ. आंबेडकर अपनेअमूल्य कार्यों की वजह से निर्वाण प्राप्त कर चुके हैं। इसी कारण से बाबा साहेब की पुण्यतिथि को महापरिनिर्वाण दिवस के तौर पर मनाया जाता है।
  7  डॉ. भीमराव आंबेडकर की पहली प्रतिमा 14 अप्रैल 1957 को दिल्ली में रानी झांसी रोड पर स्थित आंबेडकर भवन में स्थापित की गई थी |  दलित समाज के उत्थान और उन्हें जागरुक करने में डॉ. भीमराव आंबेडकर का योगदान अतुल्य है जिसे देश कभी भूल नहीं सकता। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का जीवन संघर्ष और सफलता की ऐसी अद्भुत मिसाल है, जो शायद ही कहीं और देखने को मिले।बाबा साहेब के विचार हमेशा इंसान को समाज के प्रति प्रेरित करते हैं।

 इस साल बाबा साहेब की 129 वीं जयंती मनाई जा रही है।