22 रुपये लीटर दूध बेचने को मजबूर हैं किसान, झेल रहें हैं लॉकडाउन की दोहरी मार

देश की दो तिहाई जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। जिसमे दूध उत्पादन और पशुपालन से कृषि की एक-तिहाई आय होती है| पर किसानों का मानना है कि उनकी कोई सुनने वाला नहीं। किसानों को दूध का 25-30 फीसदी कम दाम मिल रहा है , लेकिन उपभोक्ताओं के लिए कीमतें नहीं घटाई गई है| शहरों में गाय के प्योर दूध के लिए आपसे 50 से 60 रुपये लीटर वसूले जा रहें है लेकिन गांवों में दूध किसानो को गायों का दूध औने-पौने दामों पर बेचना पड़ रहा है|

22 रुपये लीटर दूध बेचने को मजबूर हैं किसान, झेल रहें हैं लॉकडाउन की दोहरी मार

 

 इस  वक्त पूरे देश के दुग्ध उत्पादकों का यही हाल है| दुग्ध उत्पादकों पर लॉकडाउन की दोहरी मार पड़ी है| लॉकडाउन के चलते एक तरफ होटल, ढाबे, चाय और मिठाई की दुकानें बंद होने से दूध, दही और पनीर की मांग बहुत घट गयी है| वहीं दूसरी तरफ पशुओं को खिलाना-पिलाना महंगा हो गया है और  सहकारी समितियों ने दूध का पहले जैसा दाम देना बंद कर दिया है |भारत के करोड़ों किसानों की फ़ैक्टरी चालू है, पर ख़रीदार नहीं, व्यापार ठप है। वहीं  छोटे किसान जिनका दूध बेचकर गुजारा होता था, सब परेशान हैं|  अब कंपनियां भी दूध का मिल्क पाउडर बनवाकर स्टोर कर रही हैं|

दरअसल, लॉकडाउन की वजह से दूध की खपत में भारी कमी हो गई है|  कुछ लोगों ने दूध लेना कम कर दिया है तो चाय और मिठाई की दुकानें बंद होने से खोवा, पनीर, मिठाई और मक्खन का बाजार ठंडा पड़ गया है|  तमाम शहरों से लोगों का गांवों की ओर पलायन हुआ है इसलिए पैकेज्ड दूध लेने वाले कम हुए हैं| डेयरी  क्षेत्र से जुड़े लोगों  की माने तो दूध की मांग में 40 से 50 फीसदी तक की रिकॉर्ड गिरावट हुई है| जिसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है|  गांवों में दूध बिक्री पर आश्रित किसानों की आय गिर गई है| क्योंकि दूध की मांग में इतनी बड़ी गिरावट कभी नहीं देखी गई थी| प्रादेशिक कॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन उत्तर प्रदेश के मुताबिक प्रदेश में रोजाना 12 हजार लीटर की जगह अब सिर्फ 5000 लीटर दूध लिया जा रहा है, क्योंकि खपत ही नहीं है| ऐसे में किसानों को दूध काम दामों पर बेचना पढ़ रहा है|

दूध की कीमतों में आयी इस गिरावट के कारण किसानों को पहले के मुकाबले 25 से 30 फीसदी कम पैसा मिल रहा है|  दुग्ध सहकारी समितियां पैसा नहीं दे रही हैं| जबकि दूध का उत्पादन जस का तस है|  इसीलिए अब किसान संगठन मांग कर रहे हैं कि सरकार फरवरी के रेट पर किसान का सारा उपलब्ध दूध खरीदे| ताकि ग्रामीणों की आय पर बुरा असर न पड़े |